भारतीय रेलवे बोर्ड की ऑनलाइन बैठक संपन्न।

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जेसीएम/स्टाफ साइड के सदस्यों के साथ ऑनलाइन मीटिंग में शामिल हुए सीआरबी सहित रेलवे बोर्ड के सभी सदस्य

Railway board ki online baithak sampann

चार वर्षों की लंबी प्रतीक्षा और काफी प्रयासों के बाद पिछले दिनों जेसीएम/स्टाफ साइड की ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें चेयरमैन सीईओ रेलवे बोर्ड सहित रेलवे बोर्ड के सभी सदस्य शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (एनएफआईआर) और ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के नेताओं ने कहा कि काफी प्रयासों के बाद यह बैठक हुई है, लेकिन भविष्य में बैठक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार निरंतर होनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

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उन्होंने कहा कि यूनियन का चुनाव पिछले दो साल से नहीं हो पा रहा है। रेलवे यूनियन की मान्यता के लिए गुप्त मतदान के आधार पर शीघ्र चुनाव कराया जाना चाहिए। डॉ एम राघवैया ने कहा कि इस मुद्दे पर चेयरमैन सीईओ रेलवे बोर्ड द्वारा स्पष्ट किया जाना चाहिए कि रेलवे में गुप्त मतदान होगा या नहीं, और यदि गुप्त मतदान होता है तो अतीत में जो मॉडेलिटीज अपनाई गई थीं, क्या वे जारी रखी जाएंगी?

फेडरेशनों ने मजदूर हित के कई अन्य मुद्दे उठाए

1. जनवरी 2020 से महंगाई भत्ता फ्रीज कर दिया गया है, इसे तत्काल भुगतान करने का आदेश दिया जाए। जनवरी 2020 से जून 2021 तक 18 महीने के एरियर का भुगतान किया जाए। साथ ही एनडीए भुगतान बिना किसी सीमा के किया जाना चाहिए।

2. रेलवे में स्वास्थ्य कर्मचारी और आरपीएफ के अलावा गार्ड, लोको पायलट, टीटीई, ट्रैकमैन सहित सभी तकनीकी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को फ्रंटलाइन श्रेणी में लाया जाना चाहिए।

3. कोविड महामारी के कारण अपनी जान गंवाने वाले रेल कर्मचारियों को 50 लाख का भुगतान किया जाए। 10 लाख का भुगतान तत्काल “एमआर राहत कोष” से किया जाना चाहिए।

4. कोरोना संक्रमित रेल कर्मचारियों को 30 दिनों का विशेष आकस्मिक अवकाश दिया जाए।

5. सभी महत्वपूर्ण स्टेशनों पर तीसरी लहर के लिए आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था की जाए।

6. निजीकरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए फेडरेशनों ने कहा कि महामारी की स्थिति में केवल रेल कर्मचारी ही काम करते हैं। वे श्रमिक स्पेशल आक्सीजन स्पेशल ट्रेन चला रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा रेलवे का निजीकरण करने का कोई औचित्य नहीं है। यह रेलकर्मियों और देशवासियों को कतई स्वीकार्य नहीं है।

7. रायबरेली कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) के निजीकरण को अविलंब रोका जाना चाहिए। खेल के मैदान निजी हाथों में नहीं सौंपे जाने चाहिए।

8. कोविड महामारी की स्थिति प्रभावी रहने तक रेलकर्मियों के आवधिक स्थानांतरण स्थगित किए जाने चाहिए।

9. सभी 72000 एक्ट अपरेंटिस को बिना किसी देरी के रेलवे में समाहित किया जाना चाहिए।

10. सभी श्रेणियों में ट्रैकमैन के लिए 10% एलडीसीई कोटे की व्यवस्था तत्काल लागू की जानी चाहिए तथा प्रतिवर्ष एलडीसीई परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए।

11. एमसीएम के सभी पदों का जेई में विलय होना चाहिए। साथ ही पोस्ट सरेंडर पर तत्काल रोक लगाई जाए।

12. पांच प्रिंटिंग प्रेसों का निजीकरण रोका जाए।

13. एसी स्टाफ के लिए रेस्ट हाउस की व्यवस्था रनिंग रूम की तरह की जाए।

14. लॉकडाउन अवधि के दौरान रनिंग स्टॉफ को 30% रनिंग अलाउंस का भुगतान किया जाए, क्योंकि वे अतिरिक्त हैं और नियमानुसार ड्यूटी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

15. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कर्मचारियों के लिए संवर्ग का तत्काल पुनर्गठन किया जाए।

16. सभी रनिंग रूम और रेस्ट रूम में सुधार और मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए।

17. ग्रेड पे 1800 के सभी पदों को ग्रेड पे 1900 में अपग्रेड किया जाए।

18. वे-साइड स्टेशनों पर कोई चिकित्सा सुविधा नहीं है। इसलिए वहां आवश्यकतानुसार चिकित्सा वैन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

19. आयकर छूट के आदेश अब तक नहीं दिए गए हैं। इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय चर्चा की जानी चाहिए और बिना किसी देरी के सीबीडीटी से आदेश लाए जाने चाहिए।

20. नई संपत्तियों के लिए नए पदों के सृजन का आदेश जारी किया जाए।

21. फेडरेशनों और रेलवे बोर्ड की संयुक्त समिति गठित कर प्वाइंट्समैन ग्रेड-4 की संरचना का आदेश तुरंत जारी किया जाए।