आलोचना ही साहित्य है – लालन दादा

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प्रेमचंद जयंती हिंदी समाज का सांस्कृतिक उत्सव है। मुंशीजी दो भाषाओं को एक साथ जोड़ने वाले महान साहित्यिक सूत्रधार हैं। उन्होंने हिंदी और उर्दू दोनों ही साहित्य विधाओं में आधुनिकता और यथार्थ वाद का प्रवर्तन किया। भारतीय जीवन की नियति को निर्धारित करने वाले किसान वर्ग के सबसे बड़े पक्षकार प्रेमचंद एक ऐसा आईना हैं जिसमें न सिर्फ हमारे समाज का अतीत और वर्तमान दिखता है बल्कि भविष्य के संकेत भी छिपे हैं।

#समस्तीपुर प्रगतिशील लेखक संघ#

समस्तीपुर प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में अध्यक्षीय संबोधित करते हुए सुरेन्द्र नारायण सिंह लालन ने कहा कि आलोचना ही साहित्य है। आलोचना से ही विभिन्न विधाओं की शाखा निकलती हैं।

#सुरेन्द्र नारायण सिंह लालन#

साहित्यकारों के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करना। जयंती-पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर लेना मात्र ही हमारा दायित्व नहीं है।

जिला सचिव सुबोध नाथ मिश्र ने बताया कि समस्तीपुर प्रगतिशील लेखक संघ राज्य व केंद्र की सरकार से मांग करती है कि कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी को भारत रत्न मिले और आर्थिक रूप से बिपन्न साहित्यकारों को आर्थिक सहायता के रूप में एक फंड विकसित हो।

उपर्युक्त दोनों प्रस्ताव का समर्थन संघ के उप सचिव सह मीडिया प्रभारी राम बालक राय ने किया।

#कुसुम साहित्य सेवा संस्थान #

#शिवेंद्र कुमार पाण्डेय#

कुसुम साहित्य सेवा संस्थान के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि माहवार जन्म लिए हुए साहित्यकार व पुण्यतिथि को लेकर श्रृंखलाबद्ध जानकारी दिया जाता है जो इस जूलाई माह के लिए कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद प्रासंगिक हैं। युवा पीढ़ी को इसकी जानकारी अत्यावश्यक है।

प्रो. रमेश झा जिला संरक्षक pwa ने कहा कि आज की पीढ़ी को सजग व सक्रिय होना आवश्यक है।

कार्यक्रम का संचालन सुबोध नाथ मिश्रा के निर्देश पर उपाध्यक्ष विनय कृष्ण ने किया। बैंकिंग एसोसिएशन के सुधीर कुमार देव, प्रो शंकर साह, साहित्यकार अशोक कुमार सिन्हा, विद्या सुमन सहित कई साहित्यकार गजलकार व साहित्यप्रेमियों ने भाग लिया।

सफल व सुप्रसिद्ध संचालक व ग़ज़लकार प्रवीण कुमार चुन्नू व अरुण अभिषेक ने उक्त अवसर पर अपनी स्वरचित गजल से कथा सम्राट को श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम का आयोजन सुबोध नाथ मिश्रा के निर्देश पर उपाध्यक्ष विनय कृष्ण ने अपने निवास स्थान आदर्श नगर में किया।