शतभिषा नक्षत्र में पूरे दिन होगी अनंत पूजा.

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#अनंत चतुर्दशी व्रत#

अनंत चतुर्दशी व्रत रविवार को भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि को शतभिषा नक्षत्र में मनाया जाएगा। श्रद्धालु सृष्टिकर्ता निर्गुण ब्रह्म नारायण की भक्ति भाव से पूजा करेंगे। सनातन धर्मावलंबी दुखों से मुक्ति व सुखों की प्राप्ति के लिए अनंत चतुर्दशी का व्रत रखेंगे। दूध-दही, पंचामृत आदि से निर्मित क्षीरसागर में कुश के बने अनंत भगवान का मंथन कर इसकी विधिवत पूजा करेंगे। ब्राह्मण-पंडितो से कथा श्रवण कर अनंत डोर धारण करेंगे। आज के दिन अनंत की कथा सुनने, अनंत धारण करने तथा मीठा पकवान प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना अत्यंत ही पुण्यप्रद माना गया है।
शतभिषा नक्षत्र में पूरे दिन होगी अनंत पूजा
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने कहा कि अनंत चतुर्दशी का त्योहार शतभिषा नक्षत्र में पूरे दिन मनाया जाएगा। कल भगवान विष्णु की पूजा कर मधुर पकवान भोग में अर्पित किया जाएगा। शतभिषा नक्षत्र 24वां नक्षत्र होता है और इसके स्वामी राहू होते हैं। इस नक्षत्र में पूजा से अनिष्ट ग्रह-गोचरों की शांति, उन्नति, यश व समृद्धि मिलती है। अनंत पूजा के बाद अनंत सूत्र बांधने से मुसीबतों से रक्षा एवं साधकों का कल्याण होता है। आज के दिन विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करना बहुत उत्तम होता है। अनंत भगवान की कथा को सुनकर श्रद्धालु चौदह गांठों वाला अनंत डोर बांधेंगे। कुछ व्रती इस दिन अपने घरों में भगवान सत्यनारायण की पूजा कर कथा का रसपान भी करते हैं। भगवान श्री हरि अनंत चतुर्दशी का उपवास करने वाले उपासक के दुखों को दूर करते हैं और उसके घर में धन-धान्य से संपन्नता लाकर उसकी विपन्नता को समाप्त कर देते हैं। अनंत की चौदह गांठे चौदह लोकों का प्रतीक है। ये गांठे पाप को बांधने व भगवान के आशीर्वाद की गांठे होती है।
व्रत व पूजन से मनचाहा वरदान
श्रीहरि की पूजा में भगवान को गुलाबी और पीले फूल, पुष्प में इत्र मिलाकर चढ़ाने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। खास मनोकामना पूर्ति के लिए श्रद्धालु भृंगराज के पत्ते, समीपत्र, तुलसी पत्र व मंजरी, धातृ के पत्ते अनंत भगवान को अर्पित करें क पूजा करने के बाद अनंत सूत्र का मंत्र ॐ अनन्ताय नम: पढ़कर पुरुष अपने दाहिने हाथ के बांह पर और स्त्री बाएं हाथ की बांह में बांधती है। महिलाएं इस दिन सौभाग्य की रक्षा, ऐश्वर्य प्राप्ति और सुख के लिए इस व्रत को करती हैं। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार चौदह वर्षों तक यह व्रत किया जाए तो विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
अनंत चतुर्दशी का आध्यात्मिक महत्व
पंडित झा ने पौराणिक मान्यताओं के आधार पर बताया कि महाभारत काल से अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरूआत हुई। यह भगवान विष्णु का पूर्ण फलदायक व्रत है। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुव:, स्व:, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए वह स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से सर्व मनोकामना पूर्ण होती है। श्रद्धालु धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान की कामना से भी इस व्रत को करते हैं।
हर गांठ में भगवान अनंत की पूजा
अनंत डोर के हर गांठ में भगवान विष्णु के विभिन्न नामों से पूजा की जाती है। पहले अनंत, फिर पुरुषोत्तम, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, बैकुंठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर एवं गोविन्द की पूजा की जाती है।
इस वैदिक मंत्र से होगी अनंत धारण
अनंत धारण करते समय इस मंत्र का उच्चारण करे : अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।
राशि के अनुसार अनंत धारण
मेष, सिंह- लाल अनंत
वृष, कर्क व तुला- चमकीला सफेद अनंत
मिथुन, कन्या- हरा अनंत
वृश्चिक- गहरा लाल अनंत
धनु, मीन- पीला अनंत
मकर, कुंभ- नीला अनंत
अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त
चतुर्दशी तिथि : पूरे दिन
चर मुहूर्त : प्रात: 07:09 बजे से 08:41 बजे तक
लाभ योग : सुबह 08:41 बजे से 10:12 बजे तक
अमृत मुहूर्त : सुबह 10:12 बजे से 11:43 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:19 बजे से 12:07 बजे तक
गुली काल मुहूर्त : 02:46 बजे से 04:17 बजे तक