बखरी बाजार स्थित माता दुर्गा के तीन मंदिरों में दुर्गा जी की भव्य प्रतिमाओं को स्थापित

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बेगूसराय जिला के बखरी बाजार स्थित माता दुर्गा के तीन मंदिरों में दुर्गा जी की भव्य प्रतिमाओं को स्थापित किया गया।लाखों की संख्या में श्रद्धालु भक्त जन यहाँ आकर पूजा अर्चना किये।सिद्ध पीठ होने की वजह से कई भक्तों ने तांत्रिक विद्या की सिद्धि भी प्राप्त की।पूर्ण आध्यात्मिक व वैदिक रीति रिवाज से यहाँ पहली पूजा से विजयादशमी की रात्रि में विसर्जन तक लगातार महिला एवं पुरुष समवेत रूप से पूजा अर्चना करते पाये गए।यहाँ सप्तमी एवं अष्टमी एक ही दिन मनाया गया,उस दिन माता का पट नहीं खोला गया।रात्रि में निशाबल के बाद पट श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोला गया।मध्य रात्रि में भी भीड़ की कोई सानी नहीं रहा।नवमी के प्रवेश के साथ ही खोइचा भरने वाली महिला श्रद्धालुओं से मंदिर भरा रहा।मेला प्रशासनिक नियंत्रण में दण्डाधिकारियों की देखरेख में संचालित रहा।यहाँ के मेला की विशेषता यह थी कि मेला में ग्रामीण महिलाएं,बच्चे,बूढ़े,जवान सभी भक्ति भावना से ओत प्रोत होकर मेला का आनन्द लेते देखे गए।दोपहर में तीनों दुर्गा स्थान से परम्परा के अनुसार गाजे बाजे के साथ सैकड़ों भक्त जन “यात्रा” में शामिल हुए,महिलाएं साथ में पम्परिक समूह गीतों को गाते यात्रा की महत्ता को गुंजायमान कर रही थी।भक्तों को निःशुल्क पेयजल की आपूर्ति सामाजिक संस्था अभिनव पहल के सदस्यों के द्वारा पिलाया गया।शाम में सबसे पहले पुरानी दुर्गा स्थान से भशान हेतु प्रतिमा को मुख्य मार्ग से होकर विसर्जन स्थल तक ले जाया गया।इनके बाद नव दुर्गा स्थान से माता की प्रतिमाओं को मुख्य मार्ग से समयावधि के अंतराल में विसर्जन हेतु ले जाया गया।अंत में वैष्णवी माता की प्रतिमाओं को मुख्य मार्ग से विसर्जन हेतु के जाया गया।बाजार के दोनों तरफ भक्तजन आरती की थाल व खोइचा लेकर इंतजार करते नजर आए।तीनों मंदिर की प्रतिमाओं के साथ हजारों लोगों का हुजूम माता के विदाई समारोह का साक्षी बने साथ साथ चल रहे थे,महिलाएं अपने झुंड में पारम्परिक गीतों को गाकर बेटी की बिदाई का इजहार कर रही थी,वहीं युवा बैंड की धुन पर थिरकते,झूमते नजर आ रहे थे।इस तरह देर रात्रि तक नदी की धाराओं में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।आर्थिक दृष्टिकोण से भी मेले का काफी महत्व रहा।मौशम अच्छा रहने से व्यापार परवान चढ़ा।मिठाई के दूकानों में बिक्री उम्मीद से कही ज्यादा रहा।खिलौना,कपड़ा,किराना व्यवसाय भी काफी अनुकूल रहा।मेले की सबसे बड़ी विशेषता थी ग्रामीण महिलाओं का निर्भीकतापूर्वक,आत्मविश्वाश के साथ पूरे दिन एवं पूरी रात घूमते नजर आना, जो नारी सषक्तिकरण का नायाब नमूना पेश करता प्रतीत हुआ।