केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में ग्यारहवें अनुसंधान परिषद की बैठक

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डा राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में ग्यारहवें अनुसंधान परिषद की बैठक की शुरुआत माननीय कुलपति डा रमेश चन्द्र श्रीवास्तव ,निदेशक अनुसंधान डा मिथिलेश कुमार एवं डा ए के शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। बैठक तीन दिनों तक चलेगी जिसमें अनुसंधान कार्य की समीक्षा के अतिरिक्त लगभग साठ एजेंडों पर चर्चा की जायेगी।बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति डा श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अनुसंधान में काफी अच्छा कार्य कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इसकी सराहना राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। उन्होंने एक कविता पढते हुये कहा कि ” शिखर और भी हैं विजय पाने को”। डा श्रीवास्तव ने कहा कि हंगर इंडेक्स में भारत का स्थान एक सौ एकवा हैं, इसमें भी बिहार और झारखंड की स्थिति अत्यंत दयनीय है। कृषि वैज्ञानिकों को यह सोचने की जरूरत है कि अनुसंधान से कैसै हम बिहार को और देश को उंचाईयों तक ले जायें।उन्होंने कहा कि सिर्फ छोटी छोटी उंचाईया् हासिल कर लेने से हमें संतुष्ट नहीं होना है । डा श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय में लगभग अस्सी अनुसंधान परियोजना विश्वविद्यालय से वित्त पोषित हैं। विश्वविद्यालय अनुसंधान में आत्मनिर्भर हो रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कृषि अवशेष के उपरांत पर काफी अच्छा कार्य हो रहा है जिसकी सराहना माननीय प्रधानमंत्री ने भी की है। यह हम सबके लिए गर्व का विषय है। अब सुकेत माडल को विस्तार देने की योजनायें बनायी जा रही हैं। बैठक में बोलते हुये विशेषज्ञ डा ए के शर्मा ने विश्वविद्यालय के कुलपति डा रमेश चन्द्र श्रीवास्तव की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को लोगों के खान पान में आ रहे बदलावों को भी ध्यान में रखकर अनुसंधान करना चाहिए। निदेशक अनुसंधान डा मिथिलेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य को ध्यान में रखकर अनुसंधान कर रहा है। बैठक में तीन प्रभेद और पांच तकनीक पर भी चर्चा की जायेगी जिसके बाद उसे राज्य प्रभेद रिलीज कमिटी के पास भेजा जायेगा। परिषद री बैठक में कुलपति डा श्रीवास्तव ने विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा रचित कई पुस्तकों का भी विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन सह निदेशक अनुसंधान डा एन के सिंह ने किया। बैठक में विश्विद्यालय के कुलसचिव डा पीपी श्रीवास्तव, निदेशक प्रसार शिक्षा, डा एम एस कुंडू, अधिष्ठाता डा सोमनाथ राय चौधरी, अधिष्ठाता डा अम्बरीष कुमार, अधिष्ठाता डा के एम सिंह,निदेशक गन्ना अनुसंधान संस्थान, डा ए के सिंह,सूचना पदाधिकारी डा कुमार राज्यवर्धन समेत कई वैज्ञानिक एवं शिक्षक उपस्थित रहे।