कृषि को जीवीकोपार्जन के बदले व्यवसायिक रूप देना आवश्यक – डॉ वीरेंद्र

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#कृषि को जीवीकोपार्जन के बदले व्यवसायिक रूप देना आवश्यक #
दरभंगा (जाले)। जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि में उद्यमिता विकास की संभावनाओं पर ई किसान चौपाल का आयोजन किया गया। स्वागत की औपचारिकता के बाद चौपाल को संबोधित करते हुए रेसिडेंट इन स्कॉलर डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा डॉ वीरेंद्र कुमार ने कृषक युवाओं से उद्यमी बनने का अनुरोध किया तथा बताया कि आज आवश्यकता है कृषि में नवाचार लाते हुए अपने उपलब्ध संसाधनों के बल पर आकृत जोखिम लेते हुए उद्यमी बनने की, जिससे किसानों की सामाजिक व आर्थिक उन्नति हो सके तथा अपने संसाधनों से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि बिहार के पास सबसे बड़ी शक्ति मानव संसाधन की है, जिसमें नवाचार का समावेश कर हम उपलब्ध संसाधनों केबल पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शामिल हो सकते हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा स्टार्टअप इंडिया, स्किल डेवलपमेंट, उद्यमिता विकास, खाद्य प्रसंस्करण समेत अनेकानेक माध्यमों से उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसके लिए तकनीकी प्रशिक्षण हैंड होल्डिंग समेत आर्थिक सहयोग भी दिया जा रहा है। वहीं मैनेज हैदराबाद के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉक्टर साहाजी संभाजी फाड ने पशुपालन के क्षेत्र में उद्यमिता विकास की संभावनाओं को प्रस्तुतीकरण के द्वारा विस्तार से बताया और राष्ट्रीय स्तर पर कृषक महिलाओं के द्वारा प्राप्त उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि अगले 10 सालों में पशुपालन के क्षेत्र में उन्नति की अपार संभावनाएं हैं। आज हमारे उत्पादों का मांग जिला स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी है। सिर्फ आवश्यकता है इस अवसर का लाभ उठाने का। वैल्यू एडिशन के द्वारा जहां हम अपने दुग्ध उत्पादो का 30 ₹40 से लेकर 400 से ₹500 तक मूल्य प्राप्त कर सकते हैं वही कुशल प्रबंधन द्वारा हम अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं। डॉ सांभा जी ने अपने संबोधन में सफल उद्यमी के गुण, प्रक्रिया, लाभ आदि का विस्तार में चर्चा किया। चौपाल को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र औरंगाबाद के प्रधान डॉ नित्यानंद औरंगाबाद जिले के किसानों की स्ट्रॉबेरी, पेठा, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन आदि के क्षेत्र में किए गए सामूहिक प्रयासों से प्राप्त उपलब्धियों की जानकारी दी तथा उन्हें देखकर अन्य किसानों को भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि हालिया करोना के त्रासद काल ने बिहार की कृषि क्षेत्र में रोजगार एवं व्यवसाय की संभावनाओं को उजागर किया है। आज अन्य देश और प्रदेशों में काम कर रहे बहुत से युवा आकर कृषि क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं जिससे उनके अपने आर्थिक लाभ के साथ-साथ अन्य किसानों केलिए भी रोजगार के अवसर का सृजन हो रहा है। डीडीएम नाबार्ड श्रीमती आकांक्षा ने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा उद्यमियों के आर्थिक सहयोग की योजनाओं की जानकारी किसानों को दी और बताया कि नाबार्ड एवं अन्य वित्तीय संस्थाएं किसानों एवं कृषक युवाओं के वित्तीय सहयोग के लिए कृत संकल्पित है। आवश्यकता है कि सरकार की योजनाओं और बैंक की आवश्यकता के अनुसार प्रस्ताव को लेकर बैंक अधिकारियों से संपर्क करने की। उन्होंने कृषक उत्पादक समूह से किसानों को जुड़ने एवं नवाचार के द्वारा उद्यमी बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे केंद्र के अध्यक्ष डॉक्टर दिव्यांशु शेखर ने बताया चौपाल के माध्यम से जिला के विभिन्न प्रखंडों के सैकड़ों किसान लाभान्वित हुई हुए हैं। अपने अभिभाषण में उन्होंने दरभंगा के कई प्रगतिशील किसानों की चर्चा की तथा उनके उपलब्धियों का अनुसरण कर अन्य किसानों से भी आगे बढ़ने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि तकनीकी सहायता के लिए कृषि विज्ञान केंद्र नियमित निशुल्क विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन करता रहता है। जरूरत है अपने संसाधनों को ध्यान में रखकर कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी सहायता एवं सरकार की योजनाओं से वित्तीय सहयोग लेते हुए अपने आप को उद्यमी के रूप में स्थापित करने की। कार्यक्रम का निर्देशन कर रहे हैं उप निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ अनुपमा कुमारी ने बताया कि करोना काल में प्रारंभ किया गया यह किसान चौपाल कार्यक्रम पूसा विश्वविद्यालय के हर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रतिमाह आयोजित किया जाता है जिसके द्वारा राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों से वर्चुअल विधि से किसानों को जोड़ा जा रहा है और किसान अपने स्थान से वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त कर पा रहे हैं।