केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के ग्यारहवें अनुसंधान परिषद की बैठक

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डा राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के ग्यारहवें अनुसंधान परिषद के तीसरे दिन फसलों के प्रभेद की अनुशंसा करने को लेकर बैठक जारी रही।इस दौरान कुलपति डा रमेश चंद्र श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बाह्य विशेषज्ञ की उपस्थिति में लगभग एक दर्जन से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा की गई। खबर लिखे जाने तक विश्व विद्यालय की ओर से गन्ने के प्रभेद CoP 18437 तथा राजेंद्र गन्ना 4 को रिलीज़ करने के लिये राज्य सरकार को अनुशंसित करने के लेकर विमर्श जारी था। कुलपति डा श्रीवास्तव विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों से गन्ने के प्रभेदों और उससे किसान को होने वाले फायदे के विषय में विस्तार से जानकारी ले रहे थे। इसी तरह परवल के प्रभेद राजेन्द्र परवल 3 को भी अनुशंसित करने को लेकर चर्चा हुई। अनुसंधान परिषद की बैठक देर शाम तक चलने की उम्मीद है जिसमें इन तीनों प्रभेदों को अनुशंसित किया जा सकता है।
किसानों के हित में विश्व विद्यालय पांच तकनीक भी अनुशंसित कर रहा है। लीची की गुठली से मछली का पोषण युक्त भोजन, भिंडी जुड़ा की हस्तचालित मशीन, धनिया में स्टेम गाल रोग का प्रबंधन, तथा सोलर चालित नाव आधारित मोटर पंप तकनीक किसानों के लिये काफी लाभप्रद है। विश्व विद्यालय में अन तकनीकों को लेकर काफी समय से काम किये जा रहे हैं और अनुसंधान में यह पाया गया है कि इससे किसानों के कृषि में लागत कम होगी तथा मुनाफा में वृद्धि होगी। अनुसंधान परिषद की बैठक में लगभग अस्सी से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा की गयी और भविष्य के लिये उचित दिशानिर्देश दिये गये। कुलपति डा श्रीवास्तव ने कहा कि विश्व विद्यालय के वैज्ञानिक काफी अच्छा कार्य कर रहे हैं। उनके समेकित प्रयासों के कारण विश्व विद्यालय की ख्याति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही। कुलपति डा श्रीवास्तव ने कोल्ड के दौरान प्रवासी मजदूरों के प्रशिक्षण और उन्हें रोजगार मुहैया कराने में विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों को यह समझने की जरूरत है कि किसान हमारे अन्नदाता हैं और उनके जीवन में सुधार के लिये वैज्ञानिकों को सतत प्रयत्नशील रहने की जरूरत है।