इन्जीनियर्स विलेज, दिल्ली करेगी मिथिला के पारंपरिक विरासत कमला नदी का उद्धार

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इन्जीनियर्स विलेज, दिल्ली करेगी मिथिला के पारंपरिक विरासत कमला नदी का उद्धार, केंद्र सरकार ने दी अनुमति

मधुबनी। नदियों को प्रदूषित होने से बचाना होगा,
सोये हुए भारत को फिर से जगाना होगा।
पिछले दिनों मन की बात के क्रम में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उक्त पंक्तियों के साथ कहा था कि नदी हमारे लिए भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि जीवंत इकाई है। पिछले कुछ दशकों से अहमदाबाद में साबरमती नदी सूख गयी थी और साल में 6-8 महीने पानी नजर ही नहीं आता था लेकिन ‘राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना’ के अंतर्गत जबसे नर्मदा नदी और साबरमती नदी को जोड़ा गया है। आज साबरमती नदी का पानी मन को प्रफुल्लित करता है। तमिलनाडु में नागणाधी नदी तो पूर्णतया सुख गई थी, परंतु वहाँ की ग्रामीण महिलाओं के प्रयास और जनभागीदारी से उस नदी को पुनर्जीवित किया गया है जिससे अब नदी में प्रचुर मात्रा में पानी उपलब्ध है। इसी तर्ज पर शहर से 8 किमी पूरब स्थित राघोपुर बलाट-रामपट्टी के बीच से बहने वाली प्राचीन कमला नदी की मृत धारा में जान लौटेगी। इन्जीनियर्स विलेज दिल्ली के सौजन्य से अटल भू-जल योजना के अंतर्गत इसका जीर्णोद्धार, दोनों तटों पर घाटों का निर्माण तथा सोन्दर्यीकरण किया जाएगा। इन्जीनियर्स विलेज दिल्ली के अध्यक्ष अनिल कर्ण ने दूरभाष पर उक्त आशय की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने मिथिला के लोक सांस्कृतिक परंपरा की इस धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रधानमंत्री को परियोजना प्रतिवेदन समर्पित किया था। केंद्र सरकार ने परियोजना को अपनी सहमति प्रदान कर बिहार सरकार को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया है। श्री कर्ण ने बताया कि केंद्र की सहमति के आलोक में बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले शुक्रवार को क्षेत्रीय विधायक संग माननीय मंत्री, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग रामप्रीत पासवान ने उपरोक्त कमला नदी के तट पर स्थापित माँ कमला देवी के मन्दिर में पहुँच हजारों की संख्या में उपस्थित क्षेत्र की जनता के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने जनसाधारण को भरोसा दिया कि मिथिला की लोक सस्कृति से जुड़ी कमला नदी की प्राचीन मृत धारा को जीवंत किया जाएगा तथा भू-जल योजना के तहत जल संसाधन शक्ति का विकास कर रोजगार के अवसर खोले जाएंगें। जिसमें वर्षा जल संचयन जल संरक्षण तथा जल छाजन के साथ मछली पालन, मोती, मखाना, सिंघारा आदि की खेती को बढ़ावा देने के साथ साथ इस जगह को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित कर रोजगार के अवसर उत्पन्न किए जाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि इस जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण के बाद तटों पर मनाए जाने वाले सामाजिक उत्सव छठ, दूर्गा पूजा सामूहिक पूजा, विवाह, मुंडन, उपनयन आदि के अवसर पर इन उत्सवों से जुड़े अनेक रोजी रोजगार के अवसर प्रशस्त हो सकेंगें।