कोविड टीकाकरण अभियान: कठिन चुनौती और कठिनाइयों के बीच रिकॉर्ड सफलता

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#कोविड टीकाकरण अभियान#: कठिन चुनौती और कठिनाइयों के बीच रिकॉर्ड सफलता#

-जय कृष्ण

देश में कोविड-19 ने विभिन्न स्तरों पर कई गंभीर चुनौतियां, खास तौर पर केंद्र सरकार के समक्ष, प्रस्तुत कर दी। देश के लोगों की जान की हिफाजत एवं उनके जहान को फिर से आबाद करने के लिए इन चुनौतियों से निपटना मुश्किल तो था पर बेहद जरूरी भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इसे उच्च प्राथमिकता देते हुए अनवरत इसके लिए जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए। कोरोना के नुकसानदेह प्रभाव से देश के लोगों को बचाने के लिए लॉकडाउन जैसे सख्त कदम उठाने के बाद सरकार ने यह माना कि इसके सहारे जान तो बचाई जा सकती है पर इस वजह से जहान को आबाद नहीं किया जा सकता है। लिहाजा कोविड के संक्रमण से बचाने के लिए सरकार के समक्ष एकमात्र कारगर उपाय टीकाकरण आया। यह काम आसान नहीं था। लेकिन आज देश ने 100 करोड़ टीकाकरण के आंकड़े को छू लिया है ।
देश की बड़ी आबादी का टीकाकरण इसकी कम उत्पादन एवं उपलब्धता को देखते हुए चुनौतीपूर्ण कार्य था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे चुनौती के रूप में लिया और इसे लेकर अपनी सरकार के मेगा मिशन को शुरू कर दिया। शुरुआत में इसकी राह में कई तरह की बाधाएं एवं परेशानी आयी पर प्रयास जारी रहा। फिर क्या था जन सहयोग भी इस मिशन से जुड़ गया और इसका फलाफल दुनिया को चौंकाने वाला निकला। अपने देश में अपने वैज्ञानिकों की कुशलता से उत्पादित टीके कोविशिल्ड और कोवैक्सिन टीके के सहारे आज देश की 40.41% आबादी पूर्ण टीकाकृत हो चुकी है। यानि इतनी आबादी को टीके के दोनों डोज लगा दिए गए हैं। इतने कम समय में इतनी बड़ी आबादी का टीकाकरण सामान्य उपलब्धि नहीं कही जा सकती है। आत्मनिर्भर भारत की यह गौरवान्वित करने वाली तस्वीर है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क लगाना, 2 गज की दूरी का पालन करना एवं हाथ साबुन से धोने के जरूरी एहतियात का पालन करने के अलावा सबसे अधिक जरूरी टीका लगवाना है। इससे आप कोरोना के जानलेवा आक्रमण से खुद को बचा सकते हैं। यह बात सभी जानें और इसका पालन करें इसके लिए सरकार ने कई स्तरों पर जागरूकता अभियानचलाया। वहीं गैर सरकारी स्तर पर भी इस कार्य में उल्लेखनीय सहयोग दिए गए।
टीकाकरण अभियान की राह आसान भी नहीं थी। पहले उत्पादन एवं उपलब्धता की कमी रही। इस वजह से टीकाकरण केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ी। देर रात तक लोग कतार में खड़े होते थे। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना के खौफ से सभी सहम गए थे और उन्हें यह बात समझ में आ गई कि टीका लेने से इस खतरे से बचा जा सकता है।
केंद्र सरकार के प्रयास और आम लोगों की जागरूकता तथा उनके सहयोग का ही यह प्रतिफल है कि आज देश में टीकाकरण का आंकड़ा एक सौ करोड़ को छू चुका है। 17 अक्टूबर की शाम तक यह आंकड़ा 97.71 करोड़ तक पहुंच गया था। इसमें 70 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें टीके की पहली खुराक दी गई है जबकि 28 करोड़ ने दूसरी खुराक ली है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को उनकी मांग के हिसाब से यथासंभव टीके उपलब्ध करायें हैं। लोगों को टीके की दोनों डोज निःशुल्क दी जा रही है। वैसे निजी अस्पतालों को सशुल्क टीका उपलब्ध कराया गया। इस वजह से वहां टीका लेने वालों को इसका शुल्क अदा करना पड़ता है। लेकिन वहां अधिक शुल्क नहीं लगे इसका भी ख्याल सरकार ने रखा है। लेकिन ज्यादातर लोग सरकारी टीकाकरण केंद्र पर ही टीका ले रहे हैं। इन केंद्रों की संख्या लगभग 30 हजार है, वहीं निजी केंद्र 1400 के करीब है।
कोविन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक टीके के लिए निबंधन कराने वालों में 18 से 44 वर्ष के युवाओं की संख्या 45 करोड़ से अधिक है, जबकि इससे अधिक उम्र वाले जिन्होंने निबंधन कराया है उनकी संख्या 30 करोड़ से कुछ अधिक है। टीकाकरण के मामले में उत्तरप्रदेश अभी अन्य राज्यों की तुलना में सबसे आगे है। वहां 11 करोड़ से अधिक का टीकाकरण किया जा चुका है। जबकि बिहार में 6.15 करोड़ लोगों को टीका दिया गया है। बिहार सरकार का लक्ष्य है कि इस वर्ष दिसंबर तक 08 करोड़ लोगों का टीकाकरण कार्य पूर्ण कर लिया जाए। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए सरकार अब वोटर लिस्ट के माध्यम से घर घर सर्वे भी कराने जा रही है ताकि कोई छूटे नहीं। अब तक 4.66 करोड़ों लोगों को टीके की पहली डोज दी जा चुकी है। जबकि 1.21 करोड़ लोगों को दूसरी डोज भी दे दी गई है। बिहार का पटना जिला देश में सर्वाधिक टीकाकरण वाला जिला बना है,जहां 50 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण किया गया है। गांधी जयंती के दिन देशभर में चलाए गए विशेष टीकाकरण अभियान के दिन 1.84 लाख लोगों का टीकाकरण कर पटना ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया। इसदिन देश भर में 2 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण किया गया। यह विश्व रिकॉर्ड बना। दरअसल केंद्र सरकार ने देश में विभिन्न अभियानों के जरिए ऐसा माहौल बनाया है कि लोग इसे उत्सव वाला अवसर मानकर न सिर्फ इसका लाभ उठा रहे हैं बल्कि इसे सफल बना रहे हैं। यही भावना टीकाकरण अभियान को सफलता के साथ आगे बढ़ा रही है।
एक अहम बात यह भी है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण की सफलता का प्रतिशत अधिक है। यह अच्छी बात भी है। क्योंकि जब कोरोना संक्रमण की रफ्तार अधिक थी, तो सरकार की चिंता ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर कहीं अधिक थी। लिहाजा वहां अधिक-से-अधिक लोग टीका लें यह बेहद जरूरी था और इसके लिए सरकार द्वारा की गई कोशिश संतोषजनक परिणाम के संकेत दे रहे हैं।
देश में टीकाकरण का प्रतिशत जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कोरोना संक्रमण के आंकड़े भी घटते जा रहे हैं। आज देश में अनलॉक का दायरा भी काफी हद तक बढ़ाया जा चुका है, मतलब यह कि बस थोड़ी सी पाबंदियां अभी कायम हैं। पहले की तरह लोग कामकाज कर रहे हैं एवं आयोजन भी हो रहे हैं। हालांकि सरकार लोगों से अब भी एहतियात बरतने को कह रही है और इस पर नजर भी रख रही है। वैसे कई जगहों से लापरवाही बरतने की खबरें भी आ रही हैं। बावजूद इसके स्थिति फिलवक्त नियंत्रण में है और बहुत चिंताजनक नहीं मानी जा रही है। इसका यह अभिप्राय हुआ कि टीकाकरण के जरिए ही लोगों को कोरोना के कहर से बचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की यह सोच सही तो साबित हुई ही साथ ही यह रंग लाती भी दिख रही है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडवीया ने इस सफलता एवं उपलब्धि पर अपनी टिप्पणी में कहा कि यह देश के प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता एवं उनके अथक प्रयास के साथ-साथ हमारे देश के वैज्ञानिकों के अनुसंधान का नतीजा है। उन्होंने कहा- करोना टीका- जय अनुसंधान।
देश में टीकाकरण अभियान के सफर पर इस संदर्भ में नजर डालना भी जरूरी है। भारत में देशव्यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत 16 जनवरी को हुई। पहले स्वास्थ्य कर्मियों को टीके की डोज दी गई। फिर 02 फरवरी से अग्रिम मोर्चे पर कार्यरत कर्मियों को टीके की डोज दी गई थी। देश में पहले कोरोनारोधी टीके की पहली 10 करोड़ खुराक के लगने में 85 दिन लगे थे। ऐसा टीके की कम उपलब्धता एवं कुछ अन्य कारणों से हुआ। फिर धीरे-धीरे स्थिति में सुधार आने लगा। अगले 45 दिनों में यह आंकड़ा 20 करोड़ को पार कर गया। इसके बाद 30 करोड़ डोज तक पहुंचने में 29 दिन लगे। वहीं 30 से 40 करोड़ डोज पहुंचने में 24 दिन लगे।
अब देश में 2 से 17 साल तक के आयु वर्ग के बच्चे एवं किशोर को टीका लगाने की तैयारी है। सीडीएससीओ की विशेषज्ञ समिति ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। हालांकि सरकार ने अभी तय नहीं किया है कि इसका इस्तेमाल कब से शुरू किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि इस कार्य में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। मतलब यह कि टीकाकरण अभियान से अब तक अलग रखे गए बच्चे एवं किशोर को भी टीका से कवर करने की तैयारी हो चुकी है। इसकी शुरुआत होते ही देश में हर आयु वर्ग का टीकाकरण हो जाएगा। इसकी सफलता कोरोना से लड़ाई में महत्वपूर्ण कवच साबित होगी। जाहिर है फिर कोरोना के दिए जख्म और दर्द को भूलकर देशवासी पहले की तरह सुरक्षित जीवन जीते हुए देश की तरक्की में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे।