जाने समस्तीपुर के नए पुलिस अधीक्षक हृदय कांत को

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बिहार के धनबाद जिला भूदा निवासी हृदय कांत को यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा में 201वां रैंक हासिल हुआ है। यह कामयाबी उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में पाई है। इससे पहले साल 2013 में भी उन्होंने इस परीक्षा में सफलता पाई थी। तब उन्हें आरआरएस की जॉब ऑफर की गई थी। उन्होंने उसे छोड़कर फिर से प्रयास करने का फैसला किया था।
हृदय कांत ने भास्कर से बातचीत में कहा कि सिविल सर्विस की तैयारी के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। पढ़ाई से ध्यान भटके, इसलिए साल 2012 में ही अपने फेसबुक एकाउंट को ब्लॉक कर दिया था। इस शनिवार को रिजल्ट आने के बाद उन्हें अपनी सफलता का पता चला। फिर सोमवार को उन्होंने तीन साल बाद दोबारा अपना फेसबुक एकाउंट खोला। हृदय कांत ने बताया कि इस दौरान उन्होंने स्मार्ट फोन भी बंद रखा।
उनके पास सिर्फ फीचर फोन है, जिससे सिर्फ बातें हो सकती है। व्हाट्सएप और ट्विटर पर भी उनका एकाउंट नहीं है। हृदय के पिता श्रीकांत तिवारी रेलवे से इसी साल रिटायर हुए हैं। मां सरोज तिवारी गृहिणी हैं।

पीजी के बाद दो साल कर चुके हैं नौकरी

हृदय ने साल 2009 में मुंबई स्थित आरबीआई की संस्था इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च से इकोनॉमिक्स में पीजी की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने एक निजी कंपनी में दो साल तक नौकरी की। फिर उसे छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारियों में जुट गए।
उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा मधुपुर के महेंद्रमुनि सरस्वती विद्या मंदिर और 12वीं की बोकारो के जीजीपीएस से की। उसके बाद दिल्ली के रामजस कॉलेज से फिजिक्स में ऑनर्स किया। इस दौरान उन्होंने अपनी एकाग्रता बनाए रखी। उनका कहना है कि कोई भी ईमानदारी से प्रयास करेगा, तो सफलता निश्चित मिलेगी।

हृदय ने बताया कि सोमवार को उनके पिता ने सिविल सर्विस परीक्षा में पहला रैंक हासिल करने वाली इरा का इंटरव्यू दिखाया। फिर कहा कि 201वें रैंक से आईपीएस कैडर तो मिल जाएगा, लेकिन उसे आईएएस के लिए फिर से तैयारी करनी चाहिए। हृदय ने कहा कि साल 2015 का पीटी 23 अगस्त को है। इसमें वे शामिल होंगे