पीएम पोषण योजना संचालन की प्रक्रिया

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जाने अंडा , फल, विद्यालय , शिक्षक चेकर मेकर और क्या कर सबकी जानकारी ONE NEWS LIVE NETWORK par

केंद्र सरकार द्वारा Pradhanmantri Poshan Shakti Nirman Yojana का शुभारंभ किया गया है। इस योजना के माध्यम से प्राथमिक कक्षाओं में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पोषण युक्त भोजन उपलब्ध करवाया जाएगा। अब तक सरकार द्वारा मिड डे भोजन योजना संचालित की जा रही थी। जिसके माध्यम से बच्चों को भोजन उपलब्ध करवाया जाता था।

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*इस योजना के संचालन में 3 पदों को सृजन किया गया है। चेकर ,मेकर ,एडमिन और वेंडर। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन की जानी है, जिसके लिए एक लैपटॉप की आवश्यकता है या फिर प्रधानाध्यापकों को कैफे में जाकर सारे कार्यों को करवाना होगा।इन कार्यों के करवाने लिए शिक्षकों को अलग से कोई राशि नहीं दी जानी है।
चेकर:- यह आपके प्रखंड के एमडीएम बीआरपी को बनाया गया है।
एजेंसी एडमिन / मेकर :- यह विद्यालय के प्रधानाध्यापक को बनाया गया है ।जिन्हें PFMS पोर्टल पर बिना सहमति के एजेंसी का नाम दे दिया गया है।
वेंडर :- मेकर (प्रधानाध्यापक)द्वारा किसी दुकानदार को बनाया जाना है।इसके लिए दुकानदार से उसका आधार कार्ड और बैंक पासबुक का छाया प्रति लेना है।
यह आप भी जानते होंगे कि बैंक भी अपने कस्टमर का बैंक डिटेल नहीं लेता है । फिर भी हम लोगों को उसका बैंक डिटेल लेना है ।यदि भविष्य में कभी उसके साथ ऑनलाइन धोखा घड़ी होती है,तो इसकी सारी जवाबदेही प्रधानाध्यापकों पर ही होगी, जिनके द्वारा उसका बैंक डिटेल लिया गया है।


                    28 फरवरी से राज्य के सभी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत की जानी है, यह आदेश दिया गया है। परंतु विद्यालय में मध्यान्ह भोजन बनवाने के लिए पूरे एक माह के लिए जलावन, तेल ,मसाला, दाल ,सब्जी ,अंडा ,फल इत्यादि आवश्यक सामग्री शिक्षकों को अपना पैसा लगा कर खरिदना होगा। विभाग पहले राशि जारी नहीं करेगा चाहे जितना भी पैसा लगे आपको लगाना होगा।

पूरे माह भोजन बनवाने के बाद वाउचर लेकर सचिव और प्रधानाध्यापक का हस्ताक्षर और मोहर लगाकर ऑनलाइन एंट्री करवाना होगा। इसके बाद एमडीएम बीआरपी द्वारा उसे अप्रूव किया जाएगा । उसके बाद ही राशि वेंडर के खाते में जा पाएगा। इस कार्य में कितना समय लगेगा यह कंफर्म नहीं है।
इसमें दो प्रश्न उठते हैं : –
(1) शिक्षक अपना पैसा लगाकर विद्यालय में भोजन क्यों बनवाए ।
(2) यदि शिक्षक अपना पैसा लगाकर विद्यालय में भोजन बनवाते हैं तो उन्हें वह पैसे जो उन्होंने खर्च किए हैं, वापस किस प्रकार होंगे ।क्योंकि मध्यान्ह भोजन योजना के खाते से राशि की निकासी नहीं की जानी है।
निदेशक मध्यान्ह भोजन योजना द्वारा 2012 में जारी पत्र में यह निर्देश जारी किया गया है कि ₹5000 से ऊपर की खरीदारी करते हैं, तो उसके लिए TIN VAT वाला भाऊचर् चाहिए।


मध्यान्ह भोजन योजना द्वारा निर्धारित परिवर्तन मूल्य की राशि इस प्रकार है:-
1 से 5 : – 4.97
6 से 8 : – 7.45
आप सभी को ज्ञात होगा 17 फरवरी 2020 से मध्यान्ह भोजन योजना विद्यालयों में बंद है ।उस समय इन्हीं राशियों से भोजन बनाया जाता था ।परंतु आज 2022 में महंगाई लगभग दोगुनी हो चुकी है। उदाहरण स्वरूप तेल 100 से 200 हो गया है ,दाल ₹60 से ₹110 हो चुका है ,गैस सिलेंडर 14:00 सौ से 1800 लगभग हो चुका है , अंडा 6 रुपए से बढ़कर ₹9 हो गया, इसी प्रकार अन्य चीजों के मूल्यों में दुगनी कि वृद्धि हुई है। परंतु विभाग की ओर से परिवर्तन मूल्य अंडा फल की राशि में कोई वृद्धि नहीं की गई है।आप समझ सकते हैं कि विद्यालयों में भोजन कैसे बन सकेगा।
परंतु विभाग को इस से कोई मतलब नहीं है। सभी लोग यही सोच रहे हैं किसी भी प्रकार से विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन बनना प्रारंभ हो जाए ,जो कि सरासर गलत है। विभागीय पदाधिकारियों को इन समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है । जबकि विभागीय पत्र के अनुसार शिक्षक मध्यान्ह भोजन का सिर्फ निगरानी करते हैं और यहां परोक्ष रूप से शिक्षक ही सभी कार्यों को करने के लिए विवश हो रहे हैं। यदि किसी भी प्रकार से शिक्षक फंसते हैं तो विभाग यह कह कर निकल जाएगा, की हम शिक्षकों से मध्यान भोजन योजना का संचालन ही नहीं करवाते हैं।