शिक्षा रणनीति – हितधारक परामर्श कार्यशाला

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“शिक्षा रणनीति” – हितधारक परामर्श कार्यशाला
दिनांक – 26 फरवरी 2022
समस्तीपुर जिले में पिछले एक दशक से क्वेस्ट अलायंस शिक्षा विभाग के साथ मिलकर काम कर रही है। लड़कियों के लिए आनंदशाला और STEM कार्यक्रम क्वेस्ट अल्लिंस के दो प्रमुख हस्तक्षेप हैं जिन्हें प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में लागू किया जाता है।

शिक्षार्थियों, समुदाय और सरकार के हितधारकों के साथ जुड़ने के लिए प्रमुख रणनीतियों को पिछले दशक में विकसित और कार्यान्वित किया गया ताकि स्कूलों को 21वी सदी के कौशल और वैज्ञानिक स्वभाव को बढ़ावा देने वाले आनंदमय, समावेशी और न्यायोचित सीखने के स्थान में बदला जा सके। समस्तीपुर में शैक्षिक हस्तक्षेप के लिए एक रणनीति विकसित करने के लिए हितधारक परामर्श कार्यशाला की योजना बनाई और इसी संबंध में विभिन्न हितधारकों (बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों) के साथ परामर्श कार्यशाला की गयी।
इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य है:
· जिले में लड़कियों के लिए आनंदशाला और STEM कार्यक्रम के आधार पर 21वीं सदी के कौशल विकसित करने और स्कूल के माहौल में सुधार के बारे में सीखने और निष्कर्षों को साझा करें ।
· अगले तीन वर्षों में हितधारकों के साथ मध्य और माध्यमिक विद्यालयों के लिए एक दिशा और हस्तक्षेप के व्यापक क्षेत्र बनाएं ।
· समस्तीपुर जिले में शैक्षिक स्थिति में सुधार लाने पर बातचीत के लिए विभन्न गैर सरकारी संस्थाओं और प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाना और शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए बात-चीत करना ।

दीपक ने कार्यशाला में सभी के आने का उद्देश्य बताते हुए कार्यशाला में सबका स्वागत किया । दीपिका सिंह, एसोसिएट निदेशक- स्कूल कार्यक्रम , कुएस्ट अल्लिंस, ने आनंदशाला कार्यक्रम के इतिहास और पिछले दशक के कार्य की चर्चा की । उन्होंने बताया की आनंदशाला एवं शिक्षा विभाग की साझेदारी में कई रणनीति अपनाई गयीं जिसमें से कुछ प्रमुख्य ये थीं: चेज लीडर कार्यक्रम- जिसमें हर प्रखंड से शिक्षकों ने चेंज प्रोजेक्ट किया, जिला संसाधन समूह का गठन किया गया , अनाद्शाला शिक्षा रत्न पुरस्कार- करीब 100 स्कूलों को पुरस्कार एवं 1000 से ज्यादा स्कूलों में नवाचार किया गया, छिजित होने वाले बच्चों की पहचान करने के लिए पूर्व संकेत प्रणाली, IVRS- ध्वनि संदेश, कंप्यूटर, स्मार्ट क्लास, ब्लेंडेड लीर्निंग जैसी और भी बहुत सारी रणनीतियों ने बच्चों एवं शिक्षकों के साथ शिक्षा में नामांकन, उपस्तिथि, सीखने की क्षमता, पढ़ने लिखने की योग्यता में बढोतरी से निरंतर जुड़ाव बनाये रखा।
त्रिशला- STEM स्कूल कार्यक्रम के बारे में बताते हुए उन्होंने लड़कियों को STEM- (science, technology, engineering and mathematics), विज्ञानिक प्रवृति की समझ विकसित करने के लिए स्कूल क्षेत्र में सफल प्रोजेक्ट के बारे में बताया ।
मोहित- अनुसंधान विशेषज्ञ, कुएस्ट अल्लिंस, ने बताया की स्कूल कार्यक्रम में पिछले दशक में स्कूल कार्यक्रम ने बिहार शिक्षा परियोजना एवं जिला शिक्षा परियोजना के साथ मिलकर बहुत बड़ा बदलाव लाया जैसे: कोविड लॉकडाउन के दौरान तुलनात्मक रूप से आनंदशाला जिन स्कूलों के साथ काम कर रही थी उनमें बच्चों की लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी में कम क्षति दिखाई दी, बच्चों के पढ़ने लिखने की योग्यता में बढोतरी, नामांकन में बादलाव देखने को मिला है ।
सौरभ कुमार- प्रधानाध्यापक, लागुन्या सुर्यकंठ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत शिक्षा में नयी प्रक्रियाओं एवं गतिविधियों के बारे में साझा किया जहाँ उन्होंने कुएस्ट अल्लिंस के काम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जोड़ते हुए बदलाव के बारे में बताया को आगे बढाना चाहिए ।
हनी सिंह, कुएस्ट अल्लिंस ने स्कूलों को समावेशी शिक्षण केंद्र बनाना, आनंदमयी वातावरण का निर्माण के लिए ब्लेंडेड लीर्निंग कार्य्रकम का निर्माण किया गया है । जिसमें कई क्षमतावर्धन कौशल से सम्बंधित सत्र बनाया गया है जैसे: नेतृत्व विकास के लिए सत्र, सीखने की कई कहानियां, समुदाये से समर्थन के लिए कौशल विकास, और चुनौतियों का निवारण करने के लिए कौशल विकास, आदि । शिक्षक कहीं भी, कभी भी वेब एप से जुड सकते हैं, फोन और प्रशिक्षण के माध्यम से हम शिक्षकों को जोड़ने की कोश्सिश करेंगे ।
कार्यशाला को आगे बढाते हुए सभी हितधारकों को समूह में बाटा गया और सभी समूह ने कुछ सुझाव दिए –
प्रधानाध्यापकों के समूह ने इन गतिविधियों जैसे:- समुदायिक पुस्तकालय, बाल संसद उन्मुखिकरन, बाल संसद गोष्ठी को आगे बढाने का सुझाव दिया ।
बाल संसद के लीडर्स ने इन गतिविधियों जैसे: बड़े बच्चों को छोटे बच्चों के ऊपर दादागिरी नहीं करनी चाहिए, बाल संसदं की गोष्ठी, स्कूल समस्यायों का समाधान बच्चों को निकलना चाहिए, टोला आधारित -छात्र मित्र का गठन, गतिविधि बोर्ड का संचालन- से पता चलता है की किस्में कितना तलेंट है, लोकतांत्रिक तरीके से बाल संसद का गठन ना की प्रधानाध्यापक के द्वारा, विज्ञान सम्बंधित प्रोजेक्ट हर स्कूल में होना चाहिए, बच्चे खुद से चेतना सत्र करवाएं गतिविधियों को आगे बढाना चाहिए ।
गैर सरकारी संस्थाओं के समूह ने इन गतिविधियों जैसे : प्रधानाध्यापक नेतृत्व कार्यक्रम, आनंदशाला शिक्षा रत्न पुरस्कार, गोष्ठी को आगे बढाना चाहिए ।

अभिभावकों के समूह ने इन गतिविधियों जैसे: अभिभावक शिक्षक बैठक, बच्चों के शिक्षा के संधर्भ में शिक्षकों के साथ बातचीत को आगे बढाना चाहिए ।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी- श्री शिवनाथ रजक ने कुएस्ट को शुभकामना देते हुए सभी को अपने क्षेत्र में शिक्षा के ऊपर अच्छा काम करने के लिए प्रेरित किया ।

इस कार्यशाला में शिक्षा रणनीति को बनाने के लिए इन प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया-

जिला स्तरीय पदाधिकारी: जिला कार्यक्रम पदाधिकारी- श्री शिवनाथ रजक, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी- श्री सुरेश कुमार, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी- श्री रमण कुमार ।
प्रखंड संसाधन सेवी- कुमार रंजन
प्रधानाध्यापक- परमानंद सहनी, अमोल कुमार, संजीव कुमार, राजीव कुमार, कुमारी विभा, मनोज कुनार, अखिलेश ठाकुर, अमीरुल हस्सन, वीरेंदर कुमार, सौरव कुमार
शिक्षक- अनीता कुंरी, पन्नालाल, सिद्धार्थ, संतोष कुमार कर्ण, अजीत कुमार
अभिभावक- मुन्नी देवी, पार्वती देवी, नसीमा खातून,
विद्यार्थी- सफीना सलीम, अंचल राज, नूर बनो, विनय कुमार, आयुष कुंर,
गैर सरकारी संस्था- राहुल राज- कौर स्टोन, संजीव कुमार- प्लान इंडिया