मंडलकारा के बंदियों को मिला वैकल्पिक रोजगार का प्रशिक्षण

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जीविका, समस्तीपुर

ONE NEWS LIVE NETWORK WEBTEAM


-जीविका द्वारा प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन
समस्तीपुर। जिला प्रशासन के दिशा निर्देशन में जीविका द्वारा मंडल कारा के बंदियों को नीरा एवं सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़ी गतिविधियों पर शनिवार को प्रशिक्षित किया गया। मंडल कारा सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन मंडल कारा के उपाधीक्षक मनोज कुमार सिंह व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ववलित कर किया। कार्यशाला का संचालन करते हुए जीविका के प्रबंधक ओम प्रकाश ने नीरा के फायदे एवं व्यवसायिक उपयोग पर प्रकाश डाला। प्रबंधक ने बताया कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बाद राज्य सरकार द्वारा सतत जीविकोपार्जन योजना एवं नीरा गतिविधि प्रारम्भ की गयी। इन योजनाओं द्वारा पूर्व में ताड़ी एवं अवैध शराब से जुड़े परिवारों को वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है। वाईपी हेमंत ने नीरा पर चर्चा करते हुए बताया कि ताड़ पेय को लोग सिर्फ नशे के लिए इस्तेमाल करते थे, पर ताड़ पेय का वास्तविक रुप नीरा है। नीरा में शरीर को फायदा पहुंचाने वाले कई पोषक तत्व उपलब्ध रहते हैं। खनिज लवण व पौष्टिकता के दृष्टिकोण से नीरा का सेवन काफी उपयोगी है। यह स्वास्थ्यवर्द्धक होता है। इसी को लेकर जीविका द्वारा नीरा को बढ़ावा देने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। सतत जीविकोपार्जन योजना के नोडल पर्सन संजीत ने सतत जीविकोपार्जन योजना पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि ताड़ी उतारने व बिक्री करने वाले अथवा देशी शराब के धंधे में शामिल रहे परिवारों को सतत जीविकोपार्जन योजना द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है। प्रशिक्षकों ने बंदियों को नीरा एवं एसजेवाई की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आने वाले दिनों में कॉम्फेड की मदद से नीरा को अलग-अलग फ्लेवर में बॉटलिंग होगी और इससे जहां नीरा पेय के साथ अन्य उत्पाद बनाया जाएगा। इन उत्पादों को पंचायत स्तर पर खोले जा रहे नीरा बिक्री केंद्र में बिक्री के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा।
कार्यशाला में मंडल कारा के उपाधीक्षक मनोज कुमार सिंह, मंडल कारा के सह्यहक अधीक्षक अमरेंद्र कुमार ने भी अपने विचारों को रखते हुए जीविका के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास से बंदियों को वैकल्पिक रोजगार का अवसर उपलब्ध होगा एवं उनकी जिंदगी बदल जाएगी। प्रथम बैच की कार्यशाला में मंडल कारा के 50 बंदियों ने प्रतिभागिता की। कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र में कैदियों ने प्रशिक्षकों से अपनी जिज्ञासा को शांत किया।