लिंग आधारित रूढ़िवादिता को तोड़ने और विज्ञान-प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित से जुड़ी करियर की संभावनाओं पर कार्य कर रहा आनंदशाला

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ONE NEWS LIVE NETWORK WEBTEAM

क्वेस्ट अलायन्स एक स्वैच्छिक संस्थान है जिसका उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं में 21वीं सदी के कौशल को सीखने और व्यवसायिक चुनौतियों को दूर करना हैं | यह राज्य सरकार, गैर-सरकारी संगठनों तथा वितीय सहयोगकर्ताओं के साथ मिलकर अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार को स्केल-अप मॉडल के द्वारा शिक्षार्थियों एवं शिक्षक में 21वीं सदी के कौशल को विकसित करने के लिए कार्य करती है.

आनंदशाला कार्यक्रम क्वेस्ट अलायन्स के शिक्षा से जुड़े कई अभियोज्नाओं में से एक है | ये बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् एवं क्वेस्ट अलायन्स का एक साझा कार्यक्रम है जिसके माध्यम से विद्यालयों को एक रोचक,एवं आनंददायी तरीके से सीखने का जगह बनाया जाता है | ये सुनिश्चित करता है कि बच्चे विद्यालय में रहें, गतिविधियों में भाग ले और स्कूलों में सीखते रहें | छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच ये बेहतर सम्बन्ध स्थापित करने में मदद करता है | आनंदशाला के माध्यम से बच्चों की भाषा क्षमता का विकास होता है और शिक्षा और अपने स्कूल से उनका जुड़ाव बढ़ता है जो कि एक खुले और रचनात्मक विकास में मददगार है | सन 2012 से शुरू कर के आनंदशाला कार्यक्रम ने 1000 सरकारी स्कूलों की मदद की है और इसकी पहुँच 400,000 से ज्यादा स्कूल के बच्चों तक, समस्तीपुर जिले में है | राज्य, जिला, ब्लाक, संकुल और स्कूल के स्तर पर इस कार्यक्रम से 4000 शिक्षकों और 1000 हेड मास्टरों पर इसका असर हुआ है |

क्वेस्ट अलायन्स एक स्वैच्छिक संस्थान है जिसका उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं में 21वीं सदी के कौशल को सीखने और व्यवसायिक चुनौतियों को दूर करना हैं | यह राज्य सरकार, गैर-सरकारी संगठनों तथा वितीय सहयोगकर्ताओं के साथ मिलकर अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार को स्केल-अप मॉडल के द्वारा शिक्षार्थियों एवं शिक्षक में 21वीं सदी के कौशल को विकसित करने के लिए कार्य करती है.

क्वेस्ट अलायंस समस्तीपुर के एक दशक

यह प्रेस वार्ता क्वेस्ट अलायंस के समस्तीपुर में एक दशक पुरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है, जहाँ पर हम बिहार शिक्षा परियोजना और सर्व शिक्षा अभियान, समस्तीपुर इकाई को सप्रेम धन्यवाद ज्ञापित करना चाहेंगे जिन्होंने हमारी सोच पर विश्वास किया कि हमारे सरकारी विद्यालयों में गुणात्मक बदलाव के लिए शैक्षणिक माहौल बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है और हमें प्रधानाध्यापक और शिक्षकों में विश्वास करना पड़ेगा और उन्हें बेहतरीन कार्यों के लिए प्रोसाहित करना पड़ेगा | हम उनके सहयोग के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित करते हैं |

लिंग आधारित रूढ़िवादिता को तोड़ने और विज्ञान-प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित से जुड़ी करियर की संभावनाओं पर कार्य कर रहा आनंदशाला

क्वेस्ट अलायन्स का एक और महत्वपूर्ण कार्यक्रम स्टेम फॉर गर्ल्स (STEM for girls) है. इसका मुख्य उद्देश्य लड़कियों को लिंग आधारित रूढ़िवादिता को तोड़ने और विज्ञान-प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित से जुड़ी करियर की संभावनाओं का पता लगाने में मदद करने के लिए तैयार किया गया है. वर्तमान में, यह कार्यक्रम बिहार के 3 जिलों में 30 उच्च विद्यालयों के साथ छात्र तथा छात्राओं को सक्षम बनाने के लिए तथा इस फील्ड में करियर चुनने के लिए चल रहा हैं | मुख्यतः यह कार्यक्रम निम्न चार बिंदु पर काम करती है:
स्वयं {खुद} की परख
जेंडर (gender)
कम्प्यूटेशनल सोच (computational thinking)
करियर

वर्ष 2016 से माई क्वेस्ट कार्यक्रम राज्य के विभिन्न ओद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण क्र्न्द्रों से जुड़े युवाओं के साथ 21वीं सदी से जुड़े कौशल को विकसित करने एवं रोजगार हेतु सक्षम बनाने की दिशा में काम कर रहा है | वर्ष 2018 से 2020 तक हमने निदेशालय, प्रशिक्षण, श्रम संसाधन विभाग के महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में राज्य के दस जिलों में 17 से ज्यादा आई.टी.आई में सक्रिय रूप से कार्य किया जिसमें रोजगार कौशल प्रयोगशाला की स्थापना एक महत्वपूर्ण बिंदु था इसके अलावा माई क्वेस्ट कार्यक्रम चिन्हित एन .एस.टी.आई (NSTI) में भी काम करती है |

आउटपुट, परिणाम और प्रभाव (2012-2022)
क्वेस्ट एलायंस समस्तीपुर जिले में 20 ब्लॉकों के सभी 998 सरकारी मिडिल स्कूलों में एक आनंदमय और समावेशी सीखने का माहौल बनाने के लिए आनंदशाला कार्यक्रम को लागू कर रहा है और इसने ड्रॉपआउट दर, उपस्थिति दर, छात्रों की जुड़ाव और ठहराव पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।
तीसरे पक्ष के द्वारा किये गए एक मूल्यांकन शोध में पाया गया कि आनंदशाला कार्यक्रम के वजह से स्कूल के शैक्षणिक माहौल में काफी बदलाव महसूस किया गया है, जिसका बच्चों के सीखने की क्षमता पे भी सकरात्मक परिणाम पड़ा है.
मौजूदा स्कूल प्रणाली जैसे चेतना सत्र, अंतिम घंटी गतिविधि, बाल संसद, मुहिम, होम विजिट, अभिभावक-शिक्षक बैठक, संकुल संसाधन समन्वयक एवं शिक्षक कार्यशाला, संकुल संसाधन समन्वयक के साथ विद्यालय भ्रमण को मजबूत करने के लिए आनंदशाला कार्यक्रम ने टूल्स और प्रक्रियाओं को डिजाइन किया जिसका प्रभाव स्कूल को सुचारू रूप से संचालन पर पड़ा है I फलस्वरूप, हितधारक प्रभावी नेतृत्वकर्ता के रूप में विकसित हुए ।
शिक्षक मान्यता एवं प्रेरणा के लिए जिला स्तर पर आनंदशाला शिक्षा रत्न पुरस्कार को संस्थापित किया गया है। 49 विद्यालयों और 7 संकुल समन्वयकों ने पुरस्कार के हिस्से के रूप में पिछले 4 वर्षों में स्मार्ट कक्षाएं ( digital classroom) एवं पुस्तकालय किट प्राप्त की हैं। आनंदशाला गोष्ठी को जिला शिक्षा विभाग के साथ प्रमुख शैक्षिक मुद्दों पर बातचीत करने और शिक्षक और प्रधानाध्यापकों के बीच अच्छे काम की सराहना करने के लिए एक मंच के रूप में डिजाइन और संगठित किया गया है।
अनुकूल स्कूल संस्कृति और पर्यावरण का विकास :
200 मॉडल स्कूल विकसित किए गए, जिससे समस्तीपुर जिले के प्रत्येक ब्लॉक में प्रधानाध्यापक, शिक्षक, बेहतर सीखने के माहौल और स्कूल प्रक्रियाओं और बेहतर सामुदायिक जुड़ाव बना पाए ।
बाल संसद ने 7 प्रखंडों के सभी स्कूलों में मजबूती प्रदान की और बाल संसद ने मॉडल स्कूलों में करीब 100 परिवर्तन परियोजनाओं का प्रदर्शन किया और ब्लॉक स्तर बाल संसद गोष्ठी के माध्यम से अपनी कहानियों को साझा किया।
7 प्रखंड के स्कूलों में चेतना सत्र के दौरान छात्रों की जुड़ाव बढ़ा और लर्निंग नेटवर्क के माध्यम से अपनी अनूठी कहानियों को साझा किया
अंतिम घंटी की गतिविधियों के माध्यम से 100 से अधिक स्कूलों में छात्र स्तर की गतिविधि का प्रदर्शन करने के लिए छात्रों द्वारा गतिविधि बोर्ड तैयार किया गया ।
स्कूल नहीं आने वाले छात्रों के लिए शिक्षकों और प्रधानाध्यापक द्वारा ट्रैकिंग और घर के दौरे सहित मुहिम गतिविधियाँ की गईं।
प्रशिक्षण एवं शिक्षण सामग्री: शिक्षकों, अभिभावकों एवं बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के शिक्षण एवं प्रशिक्षण सामग्री तैयार किये गए जैसे: मास्टर कोच, चेंज लीडर डिजिटल कंटेंट, प्रधानध्यापक एवं संकुल समन्वयक डायरी ।
अगर हम अंतिम घंटी गतिविधि की बात करे तो पारंपरिक तौर पे दो मुख्य गतिविधि करवाए जाते थे जैसे खेल कूद तथा कला और शिल्प ही प्रमुख रूप से करवाए जाते थे जबकि आनंद्शाला कार्यक्रम के प्रयास से और भी गतिविधियाँ जैसे- कहानी वाचन, थीम-आधारित वार्ता, रोले प्ले, तथ्य को समझना, इत्यादि चीजों को भी बढ़ावा मिला है | इन सबके साथ IVRS बच्चों को जोड़े रखने में एक महत्वपूर्ण उपकरण उभर कर आया है.
मध्य विद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों और युवाओं के साथ चलने वाले कार्यक्रम की सफलता के आधार पर हमने यह निर्णय लिया है कि आने वाले वर्षों में हम School to Work transition को एक छत के निचे क्रियान्वित करेंगे और समस्तीपुर में शिक्षा विभाग समस्तीपुर प्रशासन और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर यहाँ के शैक्षणिक वातवरण के निर्माण में करेंगे जिससे समस्तीपुर के शैक्षणिक माहौल पर एक अनुकूल असर पड़ेगा | कोविड के आने की वजह से हमें तकनीक को काफी करीब से जाना , समझा और अपनाया है इसीलिए क्वेस्ट अलायंस तकनीक के माध्यम से शिक्षकों और अध्यापकों को लीडरशिप की भूमिका में लेने की कोशिश करेगा |

आनंद्शाला कार्यक्रम का प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में काम करने के दौरान हमने पाया की आनंद्शाला कर्यक्रम की वजह से बच्चों तथा शिक्षक में एक बेहतर सम्बन्ध स्थापित हो पाया है I

इन दोनों कार्यक्रम के समावेश को हम समस्तीपुर में इसे जिला स्तरीय कार्यक्रम के रूप में आगे लेकर जाना चाहते है. इन दोनों कार्यक्रम का समावेश हमें कम संसाधान में एक बड़ी संख्या में हितधारकों तक पहुँच को प्राप्त करने में मदद करेगी| विद्यालय के बेहतर संचालन में प्रधान शिक्षक की भूमिका काफी अहम होती है अतएव अगर हम प्रधानाध्यापक के साथ उनके नेतृत्व कौशल पर और गंभीरता से काम करे तो परिणाम और भी बेहतर हो सकते हैं|
समस्तीपुर जिले में बहुत सारी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाएं विभिन्न मुद्दों पर काम करती है लेकिन कभी कभी वो प्रभाव नहीं मिल पाता है, जो हम चाहते हैं | अभी हाल ही में हुए एक सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ कार्यशाला में हमने पाया की इसका कारण अलग- अलग कार्यक्षेत्र तथा कार्यशैली के बीच तालमेल की कमी है | अगर हम एक एकीकृत सोच के साथ कार्य करे तो हमारे कार्यक्रम का परिणाम और भी अच्छी और गहरी हो सकती है |सिविल सोसाइटी संगठनों का नेटवर्क हमें इस उद्देश्य को प्राप्त करने में मदद करेगी |