केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ओबीसी, एससी और एसटी के प्राध्यपकों के लिए सरकार बिल लाएः उपेंद्र कुशवाहा

0
1437

वन न्यूज़ लाइव नेटवर्क।

पटना। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वित्तीय मदद से चल रहे विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी और ओबीसी की  नियुक्तियों पर संकट गहरा गया है.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोटे के लाभ के लिए विश्वविद्यालय नहीं बल्कि विभाग को एक इकाई के रूप में लिया जाना चाहिए. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने इस पर गहरी चिंता जताई है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस सिलसिले में केंद्रीय मानव संसाधान विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर को पत्र लिख कर अपनी चिंता से अवगत कराया है और तत्काल ऐसे कदम उठाने को कहा है जिससे केंद्रीय विश्वविद्यालयों या ऐसे दूसरे संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी की नियुक्तियों पर आया संकट समाप्त हो.
रालोसपा के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता फ़ज़ल इमाम मल्लिक ने कहा है कि पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने संसद में भी इस सवाल को उठाया था. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पार्टी प्रमुख ने इस पर चिंता जताई है. फजल इमाम मल्लिक ने बताया कि रालोसपा प्रमुख ने प्राध्यापकों की नियुक्ति और पदोन्नति के संदर्भ में इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. मल्लिक के मुताबिक पार्टी प्रमुख ने इस पर तत्काल कदम उठाने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिख कर कहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि इसी सत्र में बिल लाकर देश के 85% लोगों को न्याय दिलाएं. आर्थिक आधार पर आरक्षण का बिल अगर 48 घण्टे में पारित हो सकता है तो यह क्यों नहीं.
रालोसपा प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी का मानना है कि इस मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला लेकर सरकार बिल लाए. उपेंद्र कुशवाहा ने तत्काल बिल लाने की मांग करते हुए सरकार को याद दिलाया है कि पिछले सत्र में जब इस मुद्द पर आवाज उठाई गई थी तब मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा था कि हम तत्काल नियुक्तियों पर रोक लगा रहे हैं और अदालत के फैसले का इंतजार करते हैं. अदालत का फैसला हमारे पक्ष में नहीं आएगा तो हम कानून में बदलाव भी करेंगे. रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अब वक्त आ गया है कानून में बदलाव का. उपेंद्र कुशवाहा ने प्रधानमंत्री से भी अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और जिस तरीके से दस फीसद आरक्षण के लिए चौबीस घंटे में फैसला ले लिया गया. कुशवाहा ने कहा कि यह मामला भी संवेदनशील है और इस मामले पर सरकार को फौरन कदम उठाना चाहिए. रालोसपा प्रवक्ता का कहना है कि पार्टी की मांग है कि बिल सत्र के पहले दिन ही लाया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार बिल नहीं लाती है तो फिर हम सदन को चलने नहीं देंगे.
फजल इमाम मल्लिक ने कहा के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ओबीसी,एससी और एसटी शिक्षकों-प्राध्यपकों की पहले से ही कमी थी. अदालत का यह फैसला अगर लागू हो जाता है तो और ज्यादा नुकसान होगा. इसलिए पार्टी का मानना है कि सरकार जल्द से जल्द इस पर कदम उठाए और सत्र के पहले दिन ही बिल लेकर आए.