एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोड सह रेल बोगीबील पुल असम में

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डिब्रूगढ़ न्यूज़ एजेंसी।
 एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोड सह रेल बोगीबील पुल उत्तरी असम के डिब्रूगढ़ और धेमाजी के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर बन कर तैयार हो गया है। अब चीन से मिलने वाली चुनौतियों का मुकाबला भारत मजबूती से कर सकेगा। नवनिर्मित ब्रिज से असम से अरुणाचल पहुंचने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसके लिए सेना और स्थानीय लोगों को तेजपुर होकर जाने की जरूरत नहीं होगी।

ब्रह्मपुत्र नदी पर एक छोर से दूसरे छोर तक ब्रिज से पहुंचने में केवल पांच मिनट का समय लगेगा। लेकिन इससे पांच सौ किलोमीटर दूरी तय करने की जरूरत नहीं होगी। इतना नहीं, सेना और स्थानीय लोगों को नदी पार करने के लिए फेरी (नौका) का सहारा नहीं लेगा होगा। इस ऐतिहासिक ब्रिज को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसम्बर को लोकार्पण करेंगे। यह पुल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर को समर्पित होगा।

प्रधानमंत्री मंगलवार को ही इस  तीन लेन की सड़क और दो रेलवे ट्रैक वाले पुल के साथ ही तिनसुकिया-नाहरलगुन (15907-15908 ) इंटरसिटी ट्रेन का भी उद्घाटन करेंगे । ये 14 कोच की ट्रेन करीब  साढ़े पांच घन्टे लेगी। इससे असम के धेमाजी, लखीमपुर के अलावा अरुणाचल के लोगों को भी फायदा होगा। ब्रह्मपुत्र के उत्तर के जिलों के लोगों को डिब्रूगढ़ में शिक्षा और चिकित्सा की सुविधा के साथ हवाई अड्डे से आने जाने की सुविधा हो जाएगी। इसके साथ ही उत्तरी असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड  के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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मुख्य अभियन्ता मोहिंदर सिंह ने बताया कि डिब्रूगढ़ शहर से 17 किलोमीटर दूरी पर बने बोगिबील पुल की लंबाई 4.94 किलोमीटर है अनुमानित लागत 5800 करोड़ रुपये है। इस पुल का निर्माण अत्याधुनिक तकनीक से किया गया है। इसके बन जाने से ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी और उत्तरी किनारों पर मौजूद रेलवे लाइने आपस में जुड़ जाएंगी। पुल के साथ ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे पर मौजूद धमालगांव और तंगनी रेलवे स्टेशन भी तैयार हो चुके हैं।

तिनसुकिया के मंडल वाणिज्य प्रबंधक शुभम कुमार के अनुसार इस पुल के बनने से दिल्ली से डिब्रूगढ़ की रेल से दूरी साढ़े तीन घंटे कम हो जाएगी। अब ट्रेन डिब्रूगढ़ से धेमाजी, लखीमपुर, हरमती रंगिया होते हुए नाहरलगुन (अरुणाचल) पहुँचाएगी। इस मार्ग पर ज्यादा ट्रेने चल पाएंगी। अभी दिल्ली से नाहरलगुन एक साप्ताहिक ट्रैन चलती है।

ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी भाग से  ईटानगर के लिए सड़क की दूरी 150 किमी घटेगी। इस पुल के साथ कई संपर्क सड़कों तथा लिंक लाइनों का निर्माण भी किया गया है। शुभम कुमार के  अनुसार इस लाइन के खुलने से माल ढुलाई पर भी खासा असर पड़ेगा। इस समय तिनसुकिया मंडल की माल ढुलाई से आमदनी करीब ढाई करोड़ रुपए प्रतिदिन की है और बोगीबील पुल खुलने के बाद यह और बढ़ेगी।

इस पुल की परियोजना को 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने मंजूरी दी थी लेकिन इसका निर्माण अप्रैल 2002 में शुरू हो पाया था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री बाजपेयी ने इसका शिलान्यास किया था। पिछले 21 वर्षों में इस पुल के निर्माण को पूरा करने के लिये कई बार समय-सीमा बदली गई। अपर्याप्त फंड, तकनीकी अड़चनों के कारण कार्य पूरा नहीं हो सका। कई बार विफल होने के बाद आखिरकार इस साल 1 दिसंबर को पहली मालगाड़ी के इस पुल से गुजरने के साथ इसका निर्माण कार्य पूर्ण घोषित हुआ।

देश का पहला पूर्णतः वेल्डेड पुल 
इस पुल के निर्माण में कई नई तकनीक और उपस्करों का इस्तेमाल किया गया है। पुल के निर्माण में 80 हजार टन स्टील प्लेट्स का इस्तेमाल हुआ। देश का पहला पूर्णतः वेल्डेड पुल जिसमें यूरोपियन मानकों का पालन हुआ है। हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कॉपोरेशन ने मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग, ड्राई पेनिट्रेशन टेस्टिंग तथा अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग जैसी आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल किया है। बीम बनाने के लिए इटली से विशेष मशीन मंगाई गई। बीम को पिलर पर चढ़ाने के लिए 1000 टन के हाइड्रॉलिक और स्ट्रैंड जैक का इस्तेमाल किया गया। इंजीनियरों के अनुसार पुल की आयु 120 साल होने की आशा है।

सेना और स्थानीय लोगों की मुश्किलें समाप्त होगी
सेना और स्थानीय लोगों की मुश्किलें समाप्त हो जाएंगी और उनका आवागम आसान हो जाएगा। अभी लोगों को असम से अरुणाचल जाने के लिए तेजपुर रोड से जाना पड़ता है। इसमें बहुत समय लगता था। बोगीबील ब्रिज से यह 500 किलोमीटर की दूरी कम होगी। स्वीडन और डेनमार्क के बीच बने होरिशवा ब्रिज टनल की तर्ज पर बोगीबील ब्रिज को बनाया गया है।

सबसे जरूरी यह है कि चीन से मिलने वाली चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए सामरिक दृष्टि से सेना के लिए यह ब्रिज बहुत सहायक होगा। इस रेलमार्ग से रंगिया होते हुए दिल्ली जाने के लिए नया रूट बन जाएगा। यहां से दिल्ली जाने के लिए गुवाहाटी जाने की जरूरत नहीं होगी। 155 किलोमीटर की दूरी कम होगी और रेलयात्रियों को तीन घंटे समय की बचत होगी। सबसे अहम है कि स्थानीय लोगों की मुश्किलें कम होगी और रोजागर के नये अवसर मिलेंगे।

दिल्ली  की कम होगी दूरी, बढ़ेगी रेल कनेक्टिविटी: 
तिनसुकिया के मंडल वाणिज्य प्रबंधक शुभम कुमार के अनुसार इस पुल के बनने से दिल्ली से डिब्रूगढ़ की रेल से दूरी 3 घंटे कम हो जाएगी। अब ट्रैन डिब्रूगढ़ से गुवाहाटी होते हुए नाहरलगुन (अरुणाचल) पहुँचाएगी। ज्यादा ट्रेने चल पाएंगी। अभी दिल्ली से नाहरलगुन वीकली ट्रैन चलती है। 25 को प्रधानमंत्री तिनसुकिया-नाहरलगुन (15907-15908 ) इंटरसिटी ट्रेन का भी उद्घाटन करेंगे । ये 14 कोच की ट्रैन साढ़े पांच घन्टे लेगी। इससे असम के धीमाजी, लखीमपुर के अलावा अरुणाचल के लोगों को भी फायदा होगा। आगे एक राजधानी बोगीबील से धीमाजी होते हुए दिल्ली के लिए चलाई जा सकती है।

पंजाब, हरयाणा से बढ़ेगी अनाज की धुलाई
अभी असम से कोयला, उर्वरक और स्टोन चिप्स की रेल से सप्लाई उत्तर व शेष भारत को होती है। जबकि पंजाब, हरयाणा से अनाज यहाँ आता है। इस पुल के बनने से इनमें बढ़ोतरी के साथ रेलवे की आमदनी बढ़ने की संभावना है।